शराब घोटाले की जांच में नया मोड़, कोर्ट में पेश हुई चार्जशीट
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में हुए बहुचर्चित मैनपावर ओवरटाइम भुगतान घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सोमवार को विशेष न्यायालय में मुख्य आरोपी अनवर ढेबर सहित 12 लोगों के खिलाफ लगभग पांच हजार पन्नों का आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। जांच के मुताबिक, प्रदेश की मदिरा दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और एक्स्ट्रा वर्किंग डेज के नाम पर करीब 182.98 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय गबन किया गया है।
फर्जी वाउचर बनाकर हड़पी गई करोड़ों की राशि
जांच एजेंसियों की तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि साल 2019-20 से लेकर 2023-24 के दरमियान शराब दुकानों में तैनात प्लेसमेंट कर्मचारियों के नाम का गलत इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी वाउचर और दस्तावेज तैयार कर अलग-अलग मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त चार कार्य दिवस और सर्विस चार्ज के मद में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पैसा जमीनी स्तर पर काम करने वाले असल कर्मचारियों की जेब तक कभी पहुँचा ही नहीं, बल्कि इसे सांठगांठ और तय कमीशन नेटवर्क के जरिए आपस में बांट लिया गया।
घोटाले का पूरा गणित: किस मद में कितना हुआ खेल?
ईओडब्ल्यू और एसीबी द्वारा कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए सरकारी खजाने से अलग-अलग मदों में मोटी रकम निकाली गई:
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ओवरटाइम भुगतान: कर्मचारियों के अतिरिक्त समय काम करने के नाम पर करीब ₹101.20 करोड़ की हेराफेरी हुई।
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अतिरिक्त चार कार्य दिवस: इसके तहत लगभग ₹54.46 करोड़ का फर्जी भुगतान दर्शाया गया।
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सर्विस चार्ज: एजेंसियों को सर्विस चार्ज के रूप में तकरीबन ₹15.11 करोड़ जारी किए गए।
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बोनस भुगतान: त्योहारों या विशेष मौकों के बोनस के नाम पर ₹12.21 करोड़ की राशि ठिकाने लगाई गई।
इन पांच बड़ी मैनपावर सप्लाई कंपनियों पर कसा शिकंजा
मामले की विवेचना के दौरान सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारी भेजने वाली कई निजी सुरक्षा और प्लेसमेंट एजेंसियों की संदेहास्पद भूमिका उजागर हुई है। इसमें मुख्य रूप से सुमीत फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस, अलर्ट कमांडोज और ईगल इंटर सॉल्यूशन्स जैसी कंपनियां जांच के घेरे में आईं। जांच दल ने इन कंपनियों के प्रतिनिधियों, आबकारी विभाग के अफसरों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए, जिससे इस पूरे सिंडिकेट के 'कमीशन मॉडल' का भंडाफोड़ हुआ।
अनवर ढेबर समेत इन रसूखदारों के नाम चार्जशीट में दर्ज
अदालत में दाखिल किए गए इस महा-आरोप पत्र में अनवर ढेबर के अलावा जिन अन्य 11 आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें नवीन प्रताप सिंह तोमर, तिजऊराम निर्मलकर, अभिषेक सिंह, नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत दरंदले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, एन. उदय राव, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं।
ईडी की रेड में मिले कैश से खुला था राज
इस पूरे सुनियोजित घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नवंबर 2023 में एक छापेमारी के दौरान 28.80 लाख रुपये की नकदी बरामद की थी। वित्तीय जांच के दौरान यह कड़ी सामने आई कि यह कैश असल में प्लेसमेंट कंपनियों के बकाया बिलों को पास कराने के एवज में दी जाने वाली कमीशन राशि का हिस्सा था। इसके बाद ईडी ने इसकी आधिकारिक रिपोर्ट ईओडब्ल्यू और एसीबी को सौंपी, जिसके बाद राज्य की जांच एजेंसियों ने इस पर एफआईआर दर्ज कर मुकम्मल जांच शुरू की थी।
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