“हमके रील बनावे से न रोकबा” वचन के साथ हुई अनोखी शादी
वाराणसी।काशी के महामूर्ख सम्मेलन में दुल्हन को रील बनाने का वचन देकर शादी के सात फेरे लिए गए। दुल्हन ने कहा कि हमके रील बनावे से न रोकबा... काशी के राजेंद्र प्रसाद घाट पर गंगा आरती के बाद पुरनियों और काशी मिजाजों की भीड़ बढ़ने लगी। कार्ड तो 5000 बंटा था मगर पांच घंटे में 10 हजार तक दर्शक आ पहुंचे। इधर अक्खड़ मिजाजों से मंच सजा था। भीड़ में कुछ पेश करने का दबाव बढ़ा तो हास्य कवियों को आगे कर दिया गया। वे किसी राजनीति पार्टी के पिछलग्गू न समझे जाए इसके लिए कवियों को एप्रिन पहना दिया गया था, जबकि पिछले वर्षों में लंगोट और पेटीकोट गले में डाला जाता था, लेकिन इस बार कवि की राजनीतिक छवि न दिखाने के लिए एप्रिन पहनाकर कविताएं पढ़वाई गईं। सिलेंडर की किल्लत होने के चलते हर किसी को गोबर के पैकेट बंद उपले बांटे गए, जिससे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया।
सम्मेलन गर्दभ नृत्य और ची पो ची पो की आवाज संग
शुरू हुआ। विवाह का दोष काटने के लिए व्यवसायी उमेश जोगई को दुल्हन और उनकी पत्नी को दूल्हा का रूप दिया गया। पंडित वेदमूर्ति शास्त्री की ओर से दूल्हा बंगाली और दुल्हन का मारवाड़ी परंपरा में विवाह कराकर फिर काजी से निकाह पढ़वाया गया। इस पर आयोजकों का कहना है कि ये उलटा पुल्टा विवाह मूर्खों में ही ये है कि सबको लेकर चलते हैं। फिर दूल्हे ने कहा कि दुल्हन की मूछें हैं और टकली भी है, फिर भी मूर्ख समाज ने शादी को एकदम उचित माना, लेकिन अंत में जोड़ी टूट गई। विवाह टूटने के बाद विलुप्त होती लोक संस्कृति, अहिरूऊ, धोबिया, कहरवा और बनारसी नगाड़े पर मूर्खों सहित छह लड़कियों में मोहिनी नृत्य किया। फिर यहां शरीक होने आए मेहमानों का स्वागत हुआ तो कार्ड मा. लिखा देखकर किसी ने माननीय, तो किसी ने महामूर्ख समझ लिया।काशी के कवि दमदार बनारसी ने ताजमहल के अंदर शिव के होने पर कविता सुनाई। काजी ने शायरियां पढ़ी। खंडवा के रहने वाले एक दिव्यांग कवि अकबर ताज ने प्रभु श्रीराम और श्रवण कुमार कविता पढ़ी। बाराबंकी के विशाल बौखल, रीवा के कामता माखन, मिर्जापुर के जगजीवन मिश्रा, लखनऊ के धर्मराज उपाध्याय और काशी से सलीम शिवालवी, प्रशांत सिंह और प्रशांत बजरंगी ने काव्य की प्रस्तुति दी।
विवाह में कन्या क सात वचन....
1-हमके रील बनावे से न रोकबा।
2- हमके सहेलियन के साथे किटी में जाए से न रोकबा।
3- हमके ब्यूटी पार्लर जाए से न रोकबा।
4 -हमके हफ्ता में सिनेमा दिखाए ले चलबा।
5- हमके अपने घरे जाए से न रोकबा।
6- हमके अपने कमाई क आधा हिस्सा देबा।
7- हमार भाई बहिन जब चाहे तब हमरे घरे आवें त मुंह न बनईबा।
- इनकी दी गई आहुति...
- ओम संस्काराय स्वाहा
- ओम मनो वृत्ति स्वाहा
- ओम झगड़ाय स्वाहा
- ओम उदण्डाय स्वाहा
- ओम कुकुराय स्वाहा
काशी के डिजिटल जेबकतरे आपको बनाते हैं मूर्ख: एसीपी
एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना ने कहा कि काशी के डिजिटल जेब कतरे कहां छुपे हैं आपको नहीं पता, लेकिन आपके बेडरूम तक पहुंच चुके हैं। किसी की मीठी वाणी और लालच में आकर लिंक पर क्लिक कर देना ही सबसे बड़ी मूर्खता है। साइबर जालसाज आपको मूर्ख बनाए इससे पहले इन बातों पर अमल कीजिए। महामूर्ख सम्मेलन में गर्दभ नृत्य गुरु प्रसाद यादव ने किया और नीलम ने दुल्हन की भूमिका निभाई।
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