एससी/एसटी एक्ट में जमानत तभी, जब केस कमजोर हो, दलितों के केस में सुप्रीम कोर्ट ने खींची लक्ष्मण रेखा
नई दिल्ली: देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा है कि दलितों के खिलाफ उत्पीडऩ से जुड़े मामले यानी एससी/एसटी एक्ट 1989 के तहत दर्ज मामलों में किसी भी आरोपी को अग्रिम जमानत तभी दी जा सकती है, जब स्पष्ट रूप से यह साबित हो कि आरोपी के खिलाफ प्रथम द्रष्टया कोई मामला न बनता हो। यानी पहली नजर में ही यह तथ्य साबित हो जाए कि आरोपी ने दलित समुदाय के प्रति कोई हिंसा नहीं की है।
सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से लाया गया था और यह आरोपी को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने पर रोक लगाता है। इसके साथ ही पीठ ने जातिगत अत्याचार के आरोपों का सामना कर रहे एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने संबंधी बांबे हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया।
जूनागढ़ में बस पलटी, दो की मौत और 15 घायल; बड़ी दुर्घटना से हड़कंप
कपिल सिब्बल का बयान: मतगणना केंद्रों पर राज्य सरकार के कर्मचारी जरूरी
Mamata Banerjee का दावा: बंगाल में फिर बनेगी TMC सरकार
ईरान-यूएस तनाव के बीच फंसा सुपरटैंकर, रणनीतिक हलचल तेज
सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा, कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज
ईरान की कड़ी चेतावनी, अमेरिका की किसी भी कार्रवाई का जवाब देने की बात
अमिताभ बच्चन से सचिन तेंदुलकर तक, लंदन में दिखा भारत का गौरव
मुरैना में सनसनी: बदमाशों ने BJP नेता के घर पर चलाई गोलियां
SBI के साथ अनुबंध के बाद कर्मचारियों को मिलेगा भारी बीमा फायदा