हर दिन चांदी, लेकिन इस दिन सोने में चमकते हैं बाबा... दुर्लभ दर्शन को लगी लंबी कतारें, एक झलक पाने की जिद!
लोक देवता बाबा रामदेव की कर्मस्थली रामदेवरा में आषाढ़ शुक्ल दूज पर आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला. सालभर में केवल इसी दिन बाबा को सोने का मुकुट धारण कराया जाता है. इस दुर्लभ दर्शन के लिए रामदेवरा धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. जैसे ही बाबा को सोने का मुकुट पहनाया गया, मंदिर परिसर ‘जय बाबा री’ के नारों से गूंज उठा.
पोकरण स्थित रामदेवरा धाम पर परंपरागत तरीके से बाबा रामदेव को अभिषेक के बाद मुकुट धारण करवाया गया. सामान्य दिनों में चांदी का मुकुट पहनाने की परंपरा है, लेकिन आषाढ़ शुक्ल दूज पर वर्षों पुरानी परंपरा के तहत सोने का मुकुट धारण कराया जाता है. यह अवसर बेहद दुर्लभ माना जाता है और भक्त इस दिन को बेहद पावन मानते हैं.
भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था
दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई. बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन के लिए लगभग 1 किलोमीटर लंबी कतारों में श्रद्धालु खड़े रहे. कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था बाबा रामदेव समाधि समिति द्वारा की गई. दर्शन के बाद श्रद्धालु पास स्थित पवित्र तालाब में स्नान करने पहुंचे.
रामसा पीर के दरबार में सभी धर्मों का सम्मान
बाबा रामदेवजी का मंदिर धार्मिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है. यह स्थान हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करता है. इसलिए बाबा को रामसा पीर भी कहा जाता है. यहां अमीर-गरीब, हिंदू-मुस्लिम सभी श्रद्धालु समान भाव से सिर झुकाते हैं. यही कारण है कि रामदेवरा धाम पूरे भारत में आस्था का केंद्र बना हुआ है.
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