हर मनोकामना होगी पूरी, शनि प्रदोष व्रत कथा पढ़ने के हैं अनेक लाभ, जानें कब पड़ रहा ये व्रत?
सनातन धर्म में शनि प्रदोष व्रत का खास महत्व है. शनिवार के दिन पड़ने की वजह से इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करते हैं. इस बार शनि प्रदोष व्रत 11 जनवरी 2025 को पड़ रहा है. शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन में सुख-शान्ति और समृद्धि में वृद्धि होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत मंगलकारी और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है. प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ी जाती है जिससे मनुष्य का कल्याण होता है.
शनि प्रदोष व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में तीन मित्र रहते थे – राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र. राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे. धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था. एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे. ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है.’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्नी को लाने का निश्चय कर लिया. तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शनि देवता डूबे हुए हैं. ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया. ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो ज़िद पर अड़ा रहा और कन्या के माता पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी. विदाई के बाद पति-पत्नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई.
दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे. कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकूओं से पड़ा. जो उनका धन लूटकर ले गए. दोनों घर पहूंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया. उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा. जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता पिता को शनि प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें. धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया जहां उसकी हालत ठीक होती गई. यानी शनि प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए.
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