Wednesday, 29 September 2021, 5:10 AM

जीवन मंत्र

कन्या राशि प्रवेश करेगा सूर्य; इस दिन पूजा और स्नान दान की परंपरा,

Updated on 16 September, 2021, 13:57
17 सितंबर, शुक्रवार को सूर्य राशि बदलकर कन्या में आ जाएगा। इसलिए इस दिन कन्या संक्रांति मनाई जाएगी। इस पर्व पर स्नान, दान और पूजा-पाठ करना शुभ माना गया है। कन्या संक्रांति को विश्वकर्मा पूजा दिवस के रूप में भी मनाते हैं। दक्षिण भारत में ये पर्व बहुत ही खास... आगे पढ़े

कैंची काटती है, सुई जोड़ती है 

Updated on 16 September, 2021, 6:15
कैंची काटती (तोड़ती) है और सुई जोड़ती है। यही कारण है कि तोड़ने वाली कैंची पैर के नीचे पड़ी रहती है और जोड़ने वाली सुई सिर पर स्थान पाती है। इसलिए मनुष्य का यही धर्म है कि इनसान को जोड़े न कि तोड़े। उन्होंने सास-बहू में एका होने का आह्वान... आगे पढ़े

सफलता पाने के लिए क्या है जरूरी, जानें यहां!

Updated on 15 September, 2021, 6:45
धर्म के साथ हर किसी के जीवन में सफलता अहम होती है। बल्कि कहा जाता है इसे पाने के लिए ही लोग अपने जीवन में कड़ी मेहनत करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि लोग अपनी तरफ से हर तरह का संभव प्रयास करते हैं जिससे वो अपने जीवन में सफलता... आगे पढ़े

अपने पद का दुरुपयोग करना सही नहीं

Updated on 15 September, 2021, 6:30
धर्म के साथ घटना उस समय की है जब शास्त्री जी गृहमंत्री थे। यह तो सब जानते हैं कि शास्त्री जी बहुत सादगी पसंद और मितव्ययी थे। वह अपने और परिवार के ऊपर एक भी पैसा अनावश्यक नहीं खर्च करते थे। नियमों का कड़ाई से पालन करना उनकी आदत थी। एक... आगे पढ़े

सम्मान देने से सम्मान बढ़ता है

Updated on 15 September, 2021, 6:15
धर्म के साथ सम्राट अशोक एक बार अपने मंत्रियों के साथ कहीं जा रहे थे, तभी रास्ते में उनको एक भिखारी दिखाई दिया। सम्राट अपने रथ से नीचे उतरे और उस भिखारी के पास जाकर अपने सिर को बड़ी ही नम्रता के साथ उसके सामने झुकाया और फिर आगे बढ़... आगे पढ़े

अगर हमारे पास धन नहीं है तो दूसरों को प्रसन्नता तो बांट ही सकते हैं

Updated on 11 September, 2021, 12:25
कहानी - श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का वनवास चल रहा था। वे जंगल-जंगल घूम रहे थे। कई विषयों पर लक्ष्मण और सीता जी के साथ श्रीराम बातें करते थे। वन में जहां कहीं भी ऋषियों के आश्रम दिखते थे, वहां ये तीनों चले जाते थे। एक बार साधु-संतों से बातचीत कर... आगे पढ़े

अधर्म से कमाया गया भोजन

Updated on 9 September, 2021, 14:22
कहानी - महाभारत का युद्ध चल रहा था। 9 दिन बीत चुके थे। दुर्योधन ने भीष्म पितामह से शिकायत करते हुए कहा, 'आप ठीक से युद्ध नहीं कर रहे हैं। हमारे पक्ष के कई राजा मारे गए हैं। मेरे कई भाई मारे जा चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी... आगे पढ़े

सत्ता-संपदा का उन्माद

Updated on 14 August, 2021, 6:00
मनुष्य विचारशील प्राणी है, विवेकशील प्राणी है। उसके पास बुद्धि है, शक्ति है। वह अपनी बुद्धि का उपयोग करता है, चिंतन के हर कोण पर रुकता है, विवेक को जगाता है, शक्ति का नियोजन करता है और संसार के अन्य प्राणियों से बेहतर जीवन जीता है। जीने के लिए वह... आगे पढ़े

जीवन के चार आधार

Updated on 12 August, 2021, 6:00
सुसंस्कारिता के चार आधार हैं- समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी। इन्हें आध्यात्मिक-आंतरिक वरिष्ठता की दृष्टि में उतना ही महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए जितना शरीर के लिए अन्न, जल, वस्त्र और निवास अनिवार्य समझा जाता है। समझदारी का अर्थ है- दूरदर्शी विवेकशीलता अपनाना। आमतौर से लोग तात्कालिक लाभ को सब कुछ... आगे पढ़े

भोलेनाथ को जहरीला धतूरा चढ़ाने का मतलब ये कि अपने मन की कड़वाहट और जहर भी त्याग दें

Updated on 10 August, 2021, 17:03
भगवान शिव का श्रंगार बहुत ही रहस्यमयी और सबसे अलग है। उसमें नाग, भस्म, जहरीले और जंगली फूल और पत्ते शामिल हैं। ऐसा श्रंगार बताता हैं कि भगवान शिव उन सभी को भी अपनाते हैं। जिसे लोगों ने अपने से दूर कर रखा हो। यानी जो चीजें किसी काम की... आगे पढ़े

हमारे लिए बोली गईं बुरी बातों पर ध्यान देंगे तो हमारे निर्णयों पर गलत असर हो सकता है

Updated on 9 August, 2021, 18:19
कहानी - बालक ध्रुव तप करने के लिए जंगल में जा रहे थे। उनकी मां सुनीति ने उनसे कहा था, 'तुम्हारी सौतेली मां सुरुचि ने तुम्हें पिता की गोद में बैठने से रोका तो तुम्हारा मन व्यथित होना ठीक है। भगवान को प्राप्त करो तो पिता की गोद में चढ़... आगे पढ़े

ध्यान से खुल जाते हैं आत्मा के सारे चक्र  

Updated on 8 August, 2021, 6:00
उपदेशों और सिद्धांतो की इतनी भरमार है कि परमात्मा को अर्थात अपने जीवन के परम लक्ष्य को ढूंढना घास में से सुई खोजने के बराबर हो गया है। कुछ लोगों के लिए आध्यात्मिकता, माया से मुक्त होने का साधन है तो कुछ लोगों के लिए यह तप और भक्ति से... आगे पढ़े

'थुकदम’ पर शोध खोलेगा जीवन-मृत्यु का रहस्य 

Updated on 7 August, 2021, 6:00
गीता में कहा गया है कि शरीर तो एक पुतला मात्र है इसमें मौजूद आत्मा जीव है। यह जिस शरीर में होता है उस शरीर के गुण, कर्म और अपेक्षा के अनुरूप मृत्यु के बाद नया शरीर धारण कर लेता है। आत्मा न तो जन्म लेता है और न इसकी... आगे पढ़े

दूसरों के दुख से अपना दुख ज्यादा बेहतर

Updated on 3 August, 2021, 6:00
एक कहावत है 'राजा दुखी, प्रजा दुखी सुखिया का दुख दुना।' कहने का अर्थ यह है कि संसार में जिसे देखो वह अपने को दुखी ही कहेगा। राजा का अपना दुख है, प्रजा का अपना और जिसे आप सुखी माने बैठें हैं उससे पूछ कर देंखेंगे तो वह भी अपने... आगे पढ़े

लक्ष्य के प्रति समर्पण जरूरी

Updated on 30 July, 2021, 6:45
राइट बंधुओं ने पहली बार 9 नव बर, 1904 को 5 मिनट से ज्यादा देर तक हवा में उड़ान भरी थी। हवाई जहाज का आविष्कार करने वाले ऑॢवल और विल्बर राइट बचपन से ही कल्पनाशील थे। दोनों ने कल्पनाओं की उड़ान में हवाई जहाज बनाने का सपना देखना शुरू कर... आगे पढ़े

साधना और सुविधा

Updated on 30 July, 2021, 6:00
आसक्ति के पथ पर आगे बढ़ने वाले अपनी आकांक्षाओं को विस्तार देते हैं। उनकी इच्छाओं का इतना विस्तार हो जाता है, जहां से लौटना संभव नहीं है। उस विस्तार में व्यक्ति का अस्तित्व विलीन हो जाता है। फिर वह अपने लिए नहीं जीता। उसके जीवन का आधार पदार्थ बन जाता... आगे पढ़े

अंग्रेज़ी सत्ता और नैतिकता

Updated on 26 July, 2021, 6:00
सत्ता के संचालन में शक्ति की अपेक्षा रहती है या नहीं, यह एक बड़ा प्रश्न है। शक्ति दो प्रकार की होती है- नैतिक शक्ति और उपकरण शक्ति। नैतिक शक्ति के बिना तो व्यक्ति सही ढंग से प्रशासन कर ही नहीं सकता। उपकरण शक्ति का जहां तक प्रश्न है, एक सीमा... आगे पढ़े

इच्छाओं को समर्पित करते जाओ 

Updated on 25 July, 2021, 6:00
सभी इच्छाएं खुशी के लिए होती हैं। इच्छाओं का लक्ष्य ही यही है। किंतु इच्छा आपको कितनी बार लक्ष्य तक पहुंचाती है? इच्छा तुम्हें आनंद की ओर ले जाने का आभास देती है, वास्तव में वह ऐसा कर ही नहीं सकती। इसीलिए इसे माया कहते हैं। इच्छा कैसे पैदा होती... आगे पढ़े

नर या नारायण कौन थे 'राम' 

Updated on 23 July, 2021, 6:00
श्रीराम पूर्णत? ईश्वर हैं। भगवान हैं। साथ ही पूर्ण मानव भी हैं। उनके लीला चरित्र में जहां एक ओर ईश्वरत्व का वैचित्रमय लीला विन्यास है, वहीं दूसरी ओर मानवता का प्रकाश भी है। विश्वव्यापिनी विशाल यशकीर्ति के साथ सम्यक निरभिमानिता है। वज्रवत न्याय कठोरता के साथ पुष्यवत प्रेमकोमलता है। अनंत... आगे पढ़े

दिव्यता की विविधता

Updated on 20 July, 2021, 6:00
ईश्वर ने दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां तो तुम्हें दे दी हैं, लेकिन सच्चा आनन्द अपने पास रख लिया है। उस परम आनन्द को पाने के लिए तुम्हें उनके ही पास जाना होगा। ईश्वर को पाने की चेष्टा में निष्कपट रहो। एक बार परम आनन्द मिल जाने पर सब-कुछ आनन्दमय है।... आगे पढ़े

गुरु की स्वीकार्यता

Updated on 19 July, 2021, 6:00
हर वक्त संसार को गुरु की दृष्टि से देखो। तब यह संसार मलिन नहीं बल्कि प्रेम, आनन्द, सहयोगिता, दया आदि गुणों से परिपूर्ण, अधिक उत्सवपूर्ण लगेगा। तुम्हें किसी के साथ संबंध बनाने में भय नहीं होगा क्योंकि तुम्हारे पास आश्रय है। घर के अन्दर से तुम बाहर के वज्रपात, आंधी,... आगे पढ़े

सतोगुण और तमोगुण का फर्प 

Updated on 18 July, 2021, 6:00
सतोगुण में ज्ञान के विकास से मनुष्य यह जान सकता है कि कौन क्या है, लेकिन तमोगुण तो इसके सर्वधा विपरीत होता है। जो भी तमोगुण के फेर में पड़ता है, वह पागल हो जाता है और पागल पुरुष यह नहीं समझ पाता कि कौन क्या है! वह प्रगति करने... आगे पढ़े

प्रयत्न में ऊब नहीं 

Updated on 17 July, 2021, 6:00
संसार में गति के जो नियम हैं, परमात्मा में गति के ठीक उनसे उलटे नियम काम आते हैं और यहीं बड़ी मुश्किल हो जाती है।   संसार में ऊबना बाद में आता है, प्रयत्न में ऊब नहीं आती। इसलिए संसार में लोग गति करते चले जाते हैं। पर परमात्मा में प्रयत्न... आगे पढ़े

 भगवान की विचारणाएं

Updated on 11 July, 2021, 6:00
जब मनुष्य इस जिम्मेदारी को समझ ले कि मैं क्यों पैदा हुआ हूं और पैदा हुआ हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? भगवान द्वारा सोचना, विचारना, बोलना, भावनाएं आदि अमानतें मनुष्य को इसलिए नहीं दी गई हैं कि उनके द्वारा वह सुख-सुविधाएं या विलासिता के साधन जुटा अपना अहंकार पूरा... आगे पढ़े

प्रार्थना की पुकार 

Updated on 10 July, 2021, 7:00
यदि प्रार्थना सच्ची हो तो परमपिता परमेश्वर उस प्रार्थना को जरूर ही सुनते हैं। परमपिता परमेश्वर अत्यंत कृपालु और दयालु हैं, परंतु प्रार्थना के लिए भी हृदय का पवित्र और निर्मल होना अत्यंत आवश्यक है। मन का पवित्र होना, अहंकार और अभिमान से रहित होना नितांत आवश्यक है। ऐसे पवित्र-हृदय-अंत:... आगे पढ़े

 विवेक ही धर्म है   

Updated on 9 July, 2021, 6:00
युग के आदि में मनुष्य भी जंगली था। जब से मनुष्य ने विकास करना शुरू किया, उसकी आवश्यकताएं बढ़ गई। आवश्यकताओं की पूर्ति न होने से समस्या ने जन्म लिया।समस्या सामने आई तब समाधान की बात सोची गई। समाधान के स्तर दो थे- पदार्थ-जगत, मनो-जगत. प्रथम स्तर पर पदाथरे के... आगे पढ़े

जीवन और मृत्यु

Updated on 7 July, 2021, 6:00
चीन में लाओत्से के समय में ऐसी प्रचलित धारण थी कि आदमी के शरीर में नौ छेद होते हैं। उन्हीं नौ छेदों से जीवन प्रवेश करता है और उन्हीं से बाहर निकलता है। दो आंखें, दो नाक के छेद, मुंह, दो कान, जननेंद्रिय, गुदा। इसके साथ चार अंग हैं- दो... आगे पढ़े

आशा निराशा

Updated on 28 June, 2021, 6:00
एक मछुआरा था । उस दिन सुबह से शाम तक नदी में जाल डालकर मछलियाँ पकड़ने की कोशिश करता रहा , लेकिन एक भी मछली जाल में न फँसी।  जैसे -जैसे सूरज डूबने लगा, उसकी निराशा गहरी होती गयी । भगवान का नाम लेकर उसने एक बार और जाल डाला... आगे पढ़े

बदला हुआ आदमी

Updated on 26 June, 2021, 6:00
स्कॉटलैंड के एक राजा को शत्रुओं ने पराजित कर दिया। उसे धन-जन की बड़ी हानि हुई और संगी-साथी भी छूट गए। अब बस उसका जीवन बचा था, पर शत्रु उसकी टोह में थे। प्राण बचाने के लिए वह भागा-भागा फिर रहा था। स्थिति यह थी कि राजा अब मरा कि... आगे पढ़े

ध्यान-तन्मयता का नाम समाधि

Updated on 23 June, 2021, 6:00
आस्था का निर्माण हुए बिना ध्यान में जाने की क्षमता अर्जित नहीं हो सकती। कुछ व्यक्तिियों में नैसर्गिक आस्था होती है और कुछ व्यक्तिियों की आस्था का निर्माण करना पड़ता है। आस्था पर संकल्प का पुट लग जाए और अनवरत अभ्यास का प्रम चलता रहे तो आगे बढ़ने का मार्ग... आगे पढ़े

दरअसल