Tuesday, 20 April 2021, 10:40 AM

जीवन मंत्र

हमेशा दें अच्छाई पर ध्यान

Updated on 17 March, 2021, 6:30
एक किसान रोज सुबह उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था। उनमें से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था और दूसरा सही था। इस वजह से रोज घर पहुंचते-पहुंचते किसान के पास डेढ़... आगे पढ़े

हमेशा जिंदा रखें अपने अंदर का जज़बा, सपनों को मिलेगी उड़ान

Updated on 24 February, 2021, 6:15
अवधी होनहार छात्रा थी। सी.सै. स्कूल की फाइनल वर्ष की विद्यार्थी थी। डाक्टर बनने का सपना था। माता-पिता के साथ भरतपुर जा रही थी। धीमी गति से जैसे ही रेलगाड़ी स्टेशन से चली, छटपटाहट में गाड़ी चढ़ने लगी कि पैर फिसल गया। बच गई लेकिन दोनों टागें कट गईं। माता-पिता पर... आगे पढ़े

शरीर तो मंदिर है

Updated on 22 February, 2021, 6:00
आस्तिकता और कर्त्तव्यपरायणता की सद्वृत्ति का प्रभाव सबसे पहले सबसे समीपवर्ती स्वजन पर पड़ना चाहिए। हमारा सबसे निकटवर्ती सम्बन्धी हमारा शरीर हैं। उसके साथ सद्व्यवहार करना, उसे स्वस्थ और सुरक्षित रखना अत्यावश्यक है। शरीर को नर कहकर उसकी उपेक्षा करना अथवा उसे सजाने-संवारने में सारी शक्ति खर्च कर देना, दोनों... आगे पढ़े

उत्तम शरण है धर्म  

Updated on 17 February, 2021, 6:30
धर्म के बारे में भिन्न-भिन्न अवधारणाएं हैं। कुछ जीवन के लिए धर्म की अनिवार्यता को स्वीकार करते हैं। कुछ लोगों का अभिमत है कि धर्म ढकोसला है। वह आदमी को पंगु बनाता है और रूढ़ धारणाओं के घेरे में बंदी बना लेता है। शायद इन्हीं अवधारणाओं के आधार पर किसी... आगे पढ़े

खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानकर अहंकार न करें

Updated on 16 February, 2021, 6:00
ईश्वर ने जब संसार की रचना की तब उसने सभी जीवों में एक समान रक्त का संचार किया। इसलिए मनुष्य हो अथवा पशु सभी के शरीर में बह रहा खून का रंग लाल है। विभिन्न योनियों की रचना भी इसलिए की ताकि मनुष्य कभी इस बात का अहंकार न करें... आगे पढ़े

भक्तों की सहायता करते हैं ईश्वर

Updated on 15 February, 2021, 6:15
ईश्वर को हम भले ही न देख पाएं लेकिन ईश्वर हर क्षण हमें देख रहा होता है। उसकी दृष्टि हमेशा अपने भक्तों एवं सद्व्यक्तियों पर रहती है। अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि जीवन में कभी न कभी कठिन समय में ईश्वर स्वयं आकर आपकी सहायता कर चुके हैं।... आगे पढ़े

जो हो रहा है उसके जिम्मेदार हम खुद हैं

Updated on 29 January, 2021, 6:00
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु:ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों का कसूरवार भगवान को मान लेते हैं। भगवान को कोसते रहते हैं कि 'हे भगवान हमने आपका क्या बिगाड़ा जो हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।' गीता में श्री कृष्ण... आगे पढ़े

जो हो रहा है उसके जिम्मेदार हम स्वंय हैं

Updated on 24 January, 2021, 6:00
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु:ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों का कसूरवार भगवान को मान लेते हैं। भगवान को कोसते रहते हैं कि 'हे भगवान हमने आपका क्या बिगाड़ा जो हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।' गीता में श्री कृष्ण... आगे पढ़े

 द्वंद्व के बीच शांति की खोज 

Updated on 18 January, 2021, 6:00
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ। जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... आगे पढ़े

उद्यम में है लक्ष्मी का वास 

Updated on 13 January, 2021, 6:45
काम का ढेर देखकर कभी घबराना नहीं। मनुष्य काम करने के लिए ही जन्मा है। वह नहीं चाहेगा तो भी उसे काम करना ही पड़ेगा। जो कर्तव्य-कर्म करने में उत्साही है, वही दूसरों के लिए उपयोगी होने का सुख भोग सकता है। उद्यम में लक्ष्मी का वास है और आलस्य... आगे पढ़े

प्रेम और दया से ही प्रसन्न होंगे ईश्वर

Updated on 10 January, 2021, 6:00
ईश्वर को खुश करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। मंत्र साधक लाखों बार मंत्र जप करते हैं, भक्ति मार्ग पर चलने वाले लोग मंदिर जाकर ईश्वर की पूजा करते हैं। धूप-दीप आरती से भगवान को प्रसन्न करने की भी कोशिश करते हैं। इतना करने के बाद भी... आगे पढ़े

मकर संक्रांति 14 को

Updated on 9 January, 2021, 14:09
इस दिन से उत्तरायण होता है सूर्य और इस पर्व पर किए गए दान से मिलता है कई गुना पुण्य     महाभारत के मुताबिक भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के लिए उत्तरायण काल को ही चुना था     सूर्य के उत्तरायण होने पर देवताओं के दिन की शुरुआत हो जाती... आगे पढ़े

क्यों कहते हैं विष्णु भगवान को नारायण

Updated on 7 January, 2021, 6:00
भगवान विष्णु के हजारों नाम हैं। इनमें एक प्रमुख नाम है नारायण। फिल्मों, टीवी सीरियल या रामलीला में आपने देखा होगा कि नारद मुनि भगवान विष्णु को नारायण नाम से पुकारते हैं। इस नाम का धार्मिक रूप से बड़ा महत्व है। इस एक नाम में सृष्टि का संपूर्ण सार छिपा... आगे पढ़े

यक्ष-प्रश्न की युगीन व्याख्या 

Updated on 5 January, 2021, 6:00
महाभारत में एक कथा आती है। अज्ञातवास के दौरान पांडवों को घूमते हुए प्यास लगी। नकुल पानी ढूँढते-ढूँढते जलाशय के पास पहुँचे। जैसे ही वे पानी पीने को उद्यत हुए, एक यक्ष ने उन्हें रोक दिया और कहा कि मेरे प्रश्नों का उत्तर देने के बाद ही तुम पानी पी... आगे पढ़े

क्षमा भाव आत्मसात करें

Updated on 3 January, 2021, 7:00
बुद्धि का अर्थ है नीर-क्षीर विवेक करने वाली शक्ति और ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा पदार्थ को जान लेना। ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा भौतिक पदार्थ के अन्तर को जानना। आधुनिक शिक्षा में आत्मा के विषय में कोई ज्ञान नहीं दिया जाता, केवल भौतिक तत्वों तथा शारीरिक आवश्यकताओं... आगे पढ़े

मानव जीवन की गरिमा

Updated on 30 December, 2020, 6:00
नालंदा तक्षशिला जैसे अनेक विश्वविद्यालय इस देश में थे। देश की शिक्षा व्यवस्था की पूर्ति तो स्थानीय गुरुकुल ही कर लेते थे। उच्च स्तरीय एवं अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था का प्रबंध यह विश्वविद्यालय करते थे। देश-देशांतरों की भाषाएं वहां पढ़ाई जाती थीं, जिनमें पारंगत होकर अपने को विश्व सेवा के लिए... आगे पढ़े

बद्ध होने का परिणाम

Updated on 29 December, 2020, 0:00
प्रकृति द्वारा बद्ध किए गए जीव कई प्रकार के होते है। कोई सुखी है और कोई अत्यंत कर्मठ है, तो दूसरा असहाय है। इस प्रकार के मनोभाव ही प्रकृति में जीव की बद्धावस्था के कारणस्वरूप हैं। भगवद्गीता के इस अध्याय में इसका वर्णन हुआ है कि वे किस प्रकार भिन्न-भिन्न... आगे पढ़े

 प्रोध पर काबू पाना सीखों

Updated on 28 December, 2020, 0:00
यदि आपको कोई कुत्ता कहता है तो आप उसे भौंकें नहीं बल्कि मुस्कुराएँ। गालियाँ देने वाला स्वयं ही शर्मिन्दा हो जाएगा। अन्यथा सचमुच कुत्ता बन जाओगे। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपको गालियाँ देता है और आप... आगे पढ़े

ईश्वर के दर्शन

Updated on 27 December, 2020, 6:00
सरस्वती चंद्र तीर्थयात्रा पर जा रहे थे। लंबे और कठिन सफर को देखते हुए साथ में बर्तन, भोजन और जरूरत का अन्य सामान भी था। रास्ते में एक गांव पार करते हुए वह वहां के एक वीरान मंदिर में रुक गए। पहले तो सोचा कि यहां कोई नहीं होगा पर... आगे पढ़े

 मुक्ति की तलाश

Updated on 26 December, 2020, 6:00
जापान में नानहेन नामक एक परम ज्ञानी फकीर थे। एक दिन एक व्यक्ति उनके पास पहुंचकर बोला, 'मैं संन्यास लेना चाहता हूं। इसके लिए मैंने अपने घर-परिवार, रिश्ते-नाते सब को तिलांजलि दे दी है।' फकीर ने पूछा, 'क्या तुम बिल्कुल अकेले हो? तुम्हारे साथ वास्तव में कोई नहीं है।' व्यक्ति... आगे पढ़े

सब कुछ परमात्मा का है

Updated on 25 December, 2020, 6:45
महात्मा गांधी अपने समीप के धनिकों को 'बारम्बार ट्रस्टीशिप' का उपदेश देते थे। उनका तात्पर्य यह था कि सम्पत्ति का स्वामी अपने को मत मानो, बल्कि यह समझो कि ईश्वर ही सम्पत्ति का स्वामी है और तुम उसकी सुरक्षा और देख-रेख करने वाले ट्रस्टी हो। यह एक अमूल्य उपदेश है।... आगे पढ़े

ध्यान की तरंग 

Updated on 25 December, 2020, 6:00
यहूदियों में एक कथा है कि जब कोई बच्चा पैदा होता है, तो देवता आते हैं और उस बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हैं; ताकि वह भूल जाए उस सुख को, जो सुख परमात्मा के घर उसने जाना था, नहीं तो जिंदगी बड़ी कठिन हो जाएगी-दयावश ऐसा करते हैं... आगे पढ़े

लिक्विड डाइट

Updated on 24 December, 2020, 19:21
सर्दी में वेजिटेबल सूप, जिंजर वॉटर और स्मूदीज से पानी की कमी पूरी करें, ये इम्युनिटी बढ़ाएंगे और थकान घटाएंगे दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी पीना जरूरी, बीच-बीच में नींबू पानी भी ले सकते हैं वेजिटेबल जूस और स्मूदीज पानी की कमी पूरी करते हैं, ये इम्युनिटी भी बढ़ाते हैं सर्दियों... आगे पढ़े

अपने अंदर रहना ही ध्यान

Updated on 23 December, 2020, 6:00
जब हम दुखी होते हैं तो लगता है समय बहुत लम्बा है। जब प्रसन्न होते हैं तो समय का अनुभव नहीं होता है। तो प्रसन्नता या आनन्द क्या है? यह हमारी स्वयं की आत्मा है। यही आत्मतत्व शिव तत्व है या शिव का सिद्धांत है। प्राय: हम जब भगवान की... आगे पढ़े

अहं भाव न पालें

Updated on 22 December, 2020, 6:00
एक बार देशभक्त वीर शिवाजी सज्जनगढ़ का किला बनवा रहे थे। हजारों मजदूर वहां काम करते थे। एक दिन शिवाजी किले को देखने गए। यत्र की तरह उनको काम करते देखकर शिवाजी के मन में अहं आ गया। वे सोचने लगे- इन सबकी आजीविका मेरे द्वारा चलती है! इतने में... आगे पढ़े

 ईमानदारी सर्वोत्तम

Updated on 20 December, 2020, 6:00
एक राजा ने अपने उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए राज्य के सभी नौजवानों को एक-एक बीज दिया और कहा, 'इसे गमले में लगाकर सींचना और एक वर्ष के पश्चात मेरे पास लेकर आना। जिसका पौधा सबसे अच्छा होगा, उसे राजा घोषित किया जाएगा।' सब बीज लेकर खुशी-खुशी लौटे।  पांच-छह दिन... आगे पढ़े

नदी और सागर

Updated on 19 December, 2020, 6:00
सुखदेव ऋषि के आश्रम में कई शिष्य रहते थे। उनमें अनुज नामक शिष्य काफी तेज था। धीरे-धीरे वह स्वयं को अन्य शिष्यों से श्रेष्ठ मानकर दूसरों को हीन समझने लगा। ऋषि उसके अंदर छिपे अहं को समझ गए और उसे एक दिन अपने साथ एक सागर के पास ले गए।... आगे पढ़े

उत्सव है बुद्धत्व 

Updated on 2 December, 2020, 6:00
बुद्धत्व मौलिक रूप से प्रांति है, विद्रोह है, बगावत है। काशी के पंडितों की सभा प्रमाणपत्र थोड़े ही देगी बुद्ध को! बुद्धपुरुष तुम्हें पोप की पदवियों पर नहीं मिलेंगे और न शंकराचायरें की पदवियों पर मिलेंगे। क्योंकि ये तो परंपराएं हैं। और परंपरा में जो आदमी सफल होता है, वह... आगे पढ़े

विनम्रता का पाठ 

Updated on 1 December, 2020, 6:00
पंडित विद्याभूषण बहुत बड़े विद्वान थे। दूर-दूर तक उनकी चर्चा होती थी। उनके पड़ोस में एक अशिक्षित व्यक्ति रहते थे-रामसेवक। वे अत्यंत सज्जन थे और लोगों की खूब मदद किया करते थे। पंडित जी रामसेवक को ज्यादा महत्व नहीं देते थे और उनसे दूर ही रहते थे। एक दिन पंडित... आगे पढ़े

 भावना भी समझें 

Updated on 26 November, 2020, 6:00
एक आदमी बस में रोजाना ही यात्रा करता था। वह बस में केले खाता और छिलके को खिड़की से फेंक देता। एक दिन एक भाई ने कहा, 'भाई! सड़क पर छिलके डालना उचित नहीं है। दूसरे फिसलकर गिर पड़ते हैं। छिलकों को एक ओर डालना चाहिए।' उसने कहा, 'अच्छी बात... आगे पढ़े

दरअसल