Tuesday, 27 October 2020, 3:26 PM

जीवन मंत्र

स्वस्थ समाज के लिए करें आत्म जागरण 

Updated on 27 October, 2020, 6:45
पिछले कुछ समय से अध्यात्म के क्षेत्र में बाजारवाद का प्रभाव बढ़ा है। इसी वजह से अध्यात्म के क्षेत्र में भी अवमूल्यन हुआ है। अत: स्वस्थ समाज के लिए आत्म जागरण जरूरी है। जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद के अनुसार अध्यात्म के क्षेत्र में बाजारवाद ने प्रभाव डाला है और यह... आगे पढ़े

ईश्वर की कृपा बुद्धि से ही प्राप्त होती है 

Updated on 26 October, 2020, 6:00
योग में आसन, प्राणायाम, मुद्रा और आहार-विहार आदि पर तो बहुत शोध हुए हैं, अब ध्यान और मुद्रा की बारी है। इस विधा के अनुसार शांत मस्तिष्क ऊर्जा का केंद्र है तो निर्मल मन शांति और स्थिरता का। शास्त्रों  में इन केंद्रों की उपमा ब्रह्मलोक और क्षीर सागर से दी... आगे पढ़े

भय को पहचानो 

Updated on 24 October, 2020, 6:00
बहुत तरह के मानसिक भय हमें चारों तरफ से दबाए हुए हैं।उन्हें हमें पहचान लेना पड़ेगा।उन्हें हम बिना पहचाने छोड़ भी न सकेंगे।जिस भय को हम पहचान लेंगे, वह छूट जाएगा।लेकिन हम उन्हें पहचान नहीं पाते, नये-नये नाम दे देते हैं।और नाम धोखे के हैं।हम इतनी ज्यादा चालाकी में जिए... आगे पढ़े

अहंकार त्यागने वाले ही महापुरूष होते हैं 

Updated on 23 October, 2020, 6:30
बहुत से लोग दिन-रात प्रयास करते हैं कि उन्हें किसी तरह उच्च पद मिल जाए। खूब सारा पैसा हो और आराम की जिन्दगी जियें। जब ये सब प्राप्त हो जाता है तो इसे ईश्वर की कृपा मानने की बजाय अपनी काबिलियत और धन पर इतराने लगते हैं। जबकि संसार में... आगे पढ़े

भगवान का सबसे प्रिय आहार अहंकार

Updated on 21 October, 2020, 6:15
अहंकार शब्द बना है अहं से, जिसका अर्थ है 'मैं'। जब व्यक्ति में यह भावना आ जाती है कि 'जो हूं सो मैं, मुझसे बड़ा कोई दूसरा नहीं है' तभी व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है। द्वापर युग में सहस्रबाहु नाम का राजा हुआ। इसे बल का इतना अभिमान... आगे पढ़े

जीवन का अर्थ बताती है अर्थी 

Updated on 20 October, 2020, 6:00
जीवन भर व्यक्ति इसी सोच में उलझा रहता है कि उसका परिवार है, बीबी बच्चे हैं। इनके लिए धन जुटाने और सुख-सुविधाओं के इंतजाम में हर वह काम करने के लिए तैयार रहता है जिससे अधिक से अधिक धन और वैभव अर्जित कर सके। अपने स्वार्थ के लिए व्यक्ति दूसरों... आगे पढ़े

भक्त के भीतर रहते हैं कृष्ण

Updated on 17 October, 2020, 6:30
जब भगवान चैतन्य बनारस में हरे कृष्ण महामंत्र के कीर्तन का प्रवर्तन कर रहे थे, तो हजारों लोग उनका अनुसरण कर रहे थे। तत्कालीन बनारस के अत्यंत प्रभावशाली और विद्वान प्रकाशानंद सरस्वती उनको भावुक कहकर उनका उपहास करते थे। कभी-कभी भक्तों की आलोचना दार्शनिक यह सोचकर करते हैं कि भक्तगण... आगे पढ़े

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

Updated on 16 October, 2020, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... आगे पढ़े

सिद्धांत गौण है, सत्ता प्रमुख 

Updated on 13 October, 2020, 6:00
पिछले दिनों में राष्ट्रीय रंगमंच पर जिस प्रकार का राजनीतिक चरित्र उभरकर आ रहा है, वह एक गंभीर चिंता का विषय है। ऐसा लगता है, राजनीति का अर्थ देश में सुव्यवस्था बनाए रखना नहीं, अपनी सत्ता और कुर्सी बनाए रखना है। राजनीतिज्ञ का अर्थ उस नीति-निपुण व्यक्तित्व से नहीं है,... आगे पढ़े

अनंत शक्तियों का स्वामी हैं हमारा मन

Updated on 12 October, 2020, 6:00
हमें यह बात हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि मन का परमात्मा के साथ घनिष्ठ संबंध है। मन और ब्रह्म दो भिन्न वस्तुएं नहीं हैं। ब्रह्म ही मन का आकार धारण करता है। अत: मन अनंत और अपार शक्तियों का स्वामी है। मन स्वयं पुरुष है एवं जगत का रचयिता... आगे पढ़े

सुखी रहने के लिए लें धर्म की शरण! 

Updated on 11 October, 2020, 6:00
दुनिया का हर व्यक्ति केवल सुख ही चाहता है। दुख से सब दूर भागते हैं। यदि हमें सुखी रहना है तो सबसे पहले धर्म से जुड़ना होगा। किसी के मन को दुखाना भी पाप है। भागदौड़ भरी जिंदगी में आज हर व्यक्ति विवेक नहीं रख पाता है। इसलिए पाप बंध... आगे पढ़े

अपूर्णता से पूर्णता की ओर 

Updated on 10 October, 2020, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... आगे पढ़े

क्या है जीवन का सार 

Updated on 8 October, 2020, 6:00
दुख एक मानसिक कल्पना है। कोई पदार्थ, व्यक्ति या क्रिया दुख नहीं है। संसार के सब नाम-रूप गधा-हाथी, स्त्री-पुरुष, पशु-पक्षी, वृक्ष-लता आदि खिलौने हैं। हम अपने को खिलौना मानेंगे तो गधा या हाथी होने का सुख-दुख होगा, अपने को स्वर्ण, मूल्यधातु देखेंगे तो यह मनुष्य देह नहीं रहेंगे। हम विराट्... आगे पढ़े

घर में चींटियां निकल रही हैं तो जानिए शुभ-अशुभ संकेत

Updated on 6 October, 2020, 6:30
अगर घर में चींटियां निकल रही हैं तो यह आपके जीवन में होने वाली किसी बात को लेकर संकेत है। घरों में चींटियों का निकलना हम आम बात समझकर उस पर गौर नहीं करते हैं लेकिन यह बहुत बड़ी घटनाओं के बारे में संकेत देती हैं। चींटियां घर में ऊपर की... आगे पढ़े

क्या है शुद्ध अहिंसा! 

Updated on 6 October, 2020, 6:00
गांधी जी ने अपने जीवन में अहिंसा के विविध प्रयोग किए। वे एक वैज्ञानिक थे। उनका जीवन प्रयोगशाला था। उनका प्रारंभिक और अंतिम साहित्य देखने से यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट हो जाता है। बड़े जीव की सुरक्षा के लिए छोटे जीव को मारने में वे पाप बताते थे। खती को... आगे पढ़े

 गुरु तत्व का सम्मान 

Updated on 5 October, 2020, 6:00
जब भी तुमने बदले में किसी आशा के बिना किसी के किए कुछ भी किया हो, किसी को कोई सलाह दी हो, लोगों का मार्गदशर्न किया हो, उन्हें प्रेम दिया हो और उनकी देख-भाल की हो, तब तुमने गुरु की भूमिका निभाई है। गुरु  तत्व सम्मान करने की और विश्वास... आगे पढ़े

जीवन में विचार की आवश्यकता

Updated on 4 October, 2020, 6:00
कुटिल एवं असत्य विचार से मुक्ति का सरल उपाय सुविचार की भावना दृढ़ करना है। शांतिदायक सुविचार की गंगा प्रवाहित करने पर ही हम मानसिक दुर्बलता से मुक्त हो सकते हैं। प्रत्येक विचार अंत:करण में एक मानसिक मार्ग का निर्माण करता है। हमारी समस्त आदतें ऐसे ही मानसिक मार्ग हैं,... आगे पढ़े

उत्सव है बुद्धत्व 

Updated on 2 October, 2020, 6:00
बुद्धत्व मौलिक रूप से प्रांति है, विद्रोह है, बगावत है। काशी के पंडितों की सभा प्रमाणपत्र थोड़े ही देगी बुद्ध को! बुद्धपुरुष तुम्हें पोप की पदवियों पर नहीं मिलेंगे और न शंकराचायरें की पदवियों पर मिलेंगे। क्योंकि ये तो परंपराएं हैं। और परंपरा में जो आदमी सफल होता है, वह... आगे पढ़े

मौन का तन मन की सुन्दरता के लिये महत्व 

Updated on 1 October, 2020, 6:00
प्रत्येक मनुष्य सुन्दर एवं स्वस्थ्य रहना चाहता है। सुन्दरता एवं स्वस्थ्य का राज मौन मै छिपा हुआ है। सामान्यत: चुप रहना मौन है, प्राचीन पुराण बचन के साथ ईष्या, डाह, छल, कपट और हिन्सा को कम करना मोन होता है। मनोवैज्ञानिक ‘फ्रायड’ का कहना है कि जीवन अन्तर्द्वद्वी शृंखलाओं से... आगे पढ़े

 एकता में भाषा भी अवरोध

Updated on 30 September, 2020, 6:00
भाषा, जो दूसरों तक अपने विचारों को पहुंचाने का माध्यम है, उसे भी राष्ट्रीय एकता के सामने समस्या बनाकर खड़ा कर दिया जाता है. अपनी भाषा के प्रति आकषर्ण होना अस्वाभाविक नहीं है और मातृभाषा व्यक्ति के बौद्धिक विकास का सशक्त माध्यम बन सकती है, इसमें कोई संदेह नहीं. पर... आगे पढ़े

कृष्ण हैं परम पुरुष  

Updated on 29 September, 2020, 6:00
जीव तथा भगवान की स्वाभाविक स्थिति के विषय में अनेक दार्शनिक ऊहापोह में रहते हैं। जो भगवान कृष्ण को परम पुरुष के रूप में जानता है, वह सारी वस्तुओं का ज्ञाता है। अपूर्ण ज्ञाता परम सत्य के विषय में केवल चिन्तन करता जाता है, जबकि पूर्ण ज्ञाता समय का अपव्यय... आगे पढ़े

दिव्यता की विविधता  

Updated on 28 September, 2020, 6:00
ईश्वर ने दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां तो तुम्हें दे दी हैं, लेकिन सच्चा आनन्द अपने पास रख लिया है। उस परम आनन्द को पाने के लिए तुम्हें उनके ही पास जाना होगा। ईश्वर को पाने की चेष्टा में निष्कपट रहो। एक बार परम आनन्द मिल जाने पर सब-कुछ आनन्दमय है।... आगे पढ़े

गुरु की स्वीकार्यता  

Updated on 27 September, 2020, 6:00
हर वक्त संसार को गुरु की दृष्टि से देखो। तब यह संसार मलिन नहीं बल्कि प्रेम, आनन्द, सहयोगिता, दया आदि गुणों से परिपूर्ण, अधिक उत्सवपूर्ण लगेगा। तुम्हें किसी के साथ संबंध बनाने में भय नहीं होगा क्योंकि तुम्हारे पास आश्रय है। घर के अन्दर से तुम बाहर के वज्रपात, आंधी,... आगे पढ़े

 सतोगुण और तमोगुण का फर्क 

Updated on 26 September, 2020, 6:00
सतोगुण में ज्ञान के विकास से मनुष्य यह जान सकता है कि कौन क्या है, लेकिन तमोगुण तो इसके सर्वधा विपरीत होता है. जो भी तमोगुण के फेर में पड़ता है, वह पागल हो जाता है और पागल पुरुष यह नहीं समझ पाता कि कौन क्या है! वह प्रगति करने... आगे पढ़े

 शरीर, मन, बुद्धि एवं आत्मा देश में एकात्म भाव कोरोना संकट को पराजित करेगा? 

Updated on 25 September, 2020, 6:15
“विश्व समेत जब देश प्रदेश एवं आमजन संकट में हों। समाज में बाढ़, भूकंप, महामारी, बीमारी की स्थितियाँ हों, तब व्यक्ति का मूल दायित्व होता है कि वह सन्यासी बनकर गुफाओं में कँदराओं में जाकर जपतप न करे बल्कि समाज के भीतर रहकर अपने सामाजिक दायित्व की पूर्ति करे ?... आगे पढ़े

प्रयत्न में ऊब नहीं 

Updated on 25 September, 2020, 6:00
संसार में गति के जो नियम हैं, परमात्मा में गति के ठीक उनसे उलटे नियम काम आते हैं और यहीं बड़ी मुश्किल हो जाती है। संसार में ऊबना बाद में आता है, प्रयत्न में ऊब नहीं आती। इसलिए संसार में लोग गति करते चले जाते हैं। पर परमात्मा में प्रयत्न... आगे पढ़े

 ध्वनि का प्राणी शरीर पर प्रभाव  

Updated on 22 September, 2020, 6:00
यह जानकर खुश होगें की ध्वनि का प्रभाव प्रत्येक जीव के शरीर पर पड़ता है। वर्तमान औधोगिकी करण और तकनीकि से ध्वनि प्रदूषण अधिक मात्रा में बढ़ रहा है। इस ध्वनि प्रदूषण के परिणाम देखते हुये नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. राबर्ट कॉक ने सन् 1925-26 में एक बात कही थी... आगे पढ़े

किन ग्रहों की वजह से आती है रिश्तों में खटास? संबंध सुधारने के उपाय भी जान लें

Updated on 21 September, 2020, 15:17
हर ग्रह का एक खास गुण होता है. उसी गुण से मिलता जुलता रिश्ता उस ग्रह से प्रभावित होता है. अगर रिश्ते से सम्बंधित ग्रह कमजोर हुआ तो रिश्ता बिगड़ जाता है. अगर कोई रिश्ता कमजोर हुआ तो सम्बंधित ग्रह भी कमजोर हो जाता है. अगर कोई ग्रह कुंडली में... आगे पढ़े

पाप कर्म का फल हानिकारक है 

Updated on 20 September, 2020, 6:00
कहहिं कबीर यह कलि है खोटी। जो रहे करवा सो निकरै टोटी।। एक छोटा सा पहाड़ी गांव था। ग्राम के सभी लोग शराब व मांस का सेवन करते थे। जो शराब नहीं पीता था, जो मांस नहीं खाता था उसे ग्राम सजा के रूप में ग्राम बाहर कर देते थे।... आगे पढ़े

अनमोल हैं कड़वे बोल 

Updated on 19 September, 2020, 6:00
किसी ने कहा है कि अंधेरे में माचिस तलाशता हुआ हाथ, अंधेरे में होते हुए भी अंधेरे में नहीं होता, इस तलाश को अपने भीतर निरंतर जीवित रखना कोई साधारण बात नहीं है, परंतु जो लोग सफर की हदों को पहचानते हैं, जिन्हें हर मंजिल के बाद किसी नए सफर... आगे पढ़े

दरअसल