Tuesday, 18 January 2022, 10:34 PM

जीवन मंत्र

समता की अनुभूति

Updated on 16 November, 2021, 6:15
मनोबल के विकास का दूसरा सूत्र बताया गया है- स्व दर्शन समता का दर्शन या परमात्मा का दर्शन। प्रांस की यूनिवर्सिटी का एक प्रोफेसर अहंकार में आकर बोला, 'मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ  आदमी हूं।' किसी ने पूछ लिया-यह कैसे? उसने कहा, 'प्रांस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है। पेरिस प्रांस का... आगे पढ़े

चैतन्यता जरूरी

Updated on 15 November, 2021, 6:00
स्मृति और विस्मृति दोनों संतुलन अपेक्षित हैं। कुछेक व्यक्तियों में विस्मृति की बड़ी मात्रा होती है। वह हमारी चेतना की स्थिति को बहुत स्पष्ट करता है। एक व्यंग्य है। दो बहनें मिलीं। एक स्त्री ने कहा, मेरा पति बहुत भुलक्कड़ है। एक दिन बाजार में गया सब्जी लाने के लिए। ... आगे पढ़े

उपाय भी ठीक से हो

Updated on 14 November, 2021, 6:00
एक सास ने बहू से कहा, 'बहूरानी! मैं अभी बाहर जा रही हूं। एक बात का ध्यान रहे, घर में अंधेरा न घुसने पाए। बहू बहुत भोली थी। सास चली गई, सांझ होने को आई। उसने सोचा कि अंधेरा कहीं घुस न जाए, सारे दरवाजे बंद कर दिए। सब खिड़कियां... आगे पढ़े

दूसरों का हित करने में मिलता है सच्चा सुख

Updated on 13 November, 2021, 6:30
 शास्त्रों की बात , जानें धर्म के साथ एक दयालु किसान था। वह सभी के काम आता था। उसकी दो लड़कियां थीं। उन्हें वह प्राणों से भी अधिक प्यार करता था। दोनों लड़कियां खेलती-कूदती बड़ी होने लगीं। जब वे विवाह योग्य हो गईं तो किसान ने बड़ी लड़की का विवाह... आगे पढ़े

विचारों की तरंगें

Updated on 9 November, 2021, 6:00
राजा की सवारी निकल रही थी। सर्वत्र जय-जयकार हो रही थी। सवारी बाजार के मध्य से गुजर रही थी। राजा की दृष्टि एक व्यापारी पर पड़ी। वह चन्दन का व्यापार करता था। राजा ने व्यापारी को देखा। मन में घृणा और ग्लानि उभर आई। उसने मन ही मन सोचा, 'यह... आगे पढ़े

अज्ञान का आवरण

Updated on 8 November, 2021, 6:00
गुरू के पास डंडा था। उस डंडे में विशेषता थी कि उसे जिधर घुमाओ, उधर उस व्यक्ति की सारी खामियां दिखने लग जाएं। गुरू ने शिष्य को डंडा दे दिया। कोई भी आता, शिष्य डंडा उधर कर देता। सब कुरूप-ही-कुरूप सामने दीखते। अब भीतर में कौन कुरूप नहीं है? हर... आगे पढ़े

प्रार्थना की शक्ति का महत्व...

Updated on 6 November, 2021, 6:45
मनुष्य का जीवन उसकी शारीरिक एवं प्राणिक सत्ता में नहीं, अपितु उसकी मानसिक एवं आध्यात्मिक सत्ता में भी आकांक्षाओं तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और कामनाओं का है। जब उसे ज्ञान होता है कि एक महत्तर शक्ति संसार को संचालित कर रही है, तब वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति... आगे पढ़े

सफलता हासिल करने के लिए संघर्षों का सामना करना ही पड़ता है!

Updated on 3 November, 2021, 6:45
 शास्त्रों की बात , जानें धर्म के साथ एक व्यक्ति ने तितली का एक लारवा देखा जो एक सुरक्षित खोल (प्यूपा) में बंद था। कुछ दिन बाद उसमें एक छोटा-सा छेद दिखा। व्यक्ति ने देखा कि एक तितली उस छोटे से छेद में से बाहर निकलने की कोशिश में जोर लगा... आगे पढ़े

विश्वास की ताकत

Updated on 2 November, 2021, 6:00
एक अंग्रेज अफसर अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ जहाज में सवार होकर सफर पर निकला। रास्ते में समुद्र में जोर का तूफान आया। मुसाफिर घबरा उठे। पर वह अंग्रेज अफसर जरा भी नहीं घबराया। उसकी पत्नी भी व्याकुल हो गई थी। उसने अपने पति से पूछा-इतना खतरनाक तूफान आया है।... आगे पढ़े

सुखी रहना है तो ईश्वर से शिकायत न करें

Updated on 29 October, 2021, 6:15
इंसानों की एक सामान्य आदत है कि तकलीफ में वह भगवान को याद करता है और शिकायत भी करता है कि यह दिन उसे क्यूं देखने पड़ रहे हैं। अपने बुरे दिन के लिए इंसान सबसे ज्यादा भगवान को कोसता है। जब भगवान को कोसने के बाद भी समस्या से... आगे पढ़े

जीवन का अर्थ बताती है अर्थी

Updated on 20 October, 2021, 6:15
जीवन भर व्यक्ति इसी सोच में उलझा रहता है कि उसका परिवार है, बीबी बच्चे हैं। इनके लिए धन जुटाने और सुख-सुविधाओं के इंतजाम में हर वह काम करने के लिए तैयार रहता है जिससे अधिक से अधिक धन और वैभव अर्जित कर सके। अपने स्वार्थ के लिए व्यक्ति दूसरों... आगे पढ़े

दान और परोपकार से घटता नहीं है धन

Updated on 19 October, 2021, 6:15
सभी धर्मों में कहा गया है कि दान करो। दान करने से धन घटता नहीं है बल्कि आपका धन बढ़ता है। लेकिन समस्या यह है कि लोग धन बढ़ने का तात्पर्य यह समझते हैं कि आज आप सौ रूपये कमाते हैं तो कल हजार रूपये कमाने लगेंगे। शास्त्रों में मुद्रा... आगे पढ़े

दया करने वालों की जय-जयकार होती है

Updated on 18 October, 2021, 6:15
हर व्यक्ति अधिक से अधिक धन कमाने के पीछे व्यवहारिकता एवं मानवीय मूल्यों को भूलता जा रहा है। रास्ते में अगर कोई मजबूर व्यक्ति दिख जाए तो कोई बेबसी प्रकट करने के लिए दो पल रूक जाए यही बड़ी बात होती है। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो किसी... आगे पढ़े

भक्त के भीतर रहते हैं कृष्ण

Updated on 17 October, 2021, 6:00
जब भगवान चैतन्य बनारस में हरे कृष्ण महामंत्र के कीर्तन का प्रवर्तन कर रहे थे, तो हजारों लोग उनका अनुसरण कर रहे थे। तत्कालीन बनारस के अत्यंत प्रभावशाली और विद्वान प्रकाशानंद सरस्वती उनको भावुक कहकर उनका उपहास करते थे। कभी-कभी भक्तों की आलोचना दार्शनिक यह सोचकर करते हैं कि भक्तगण अंधकार... आगे पढ़े

द्वंद्व के बीच शांति की खोज

Updated on 15 October, 2021, 6:45
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ।  जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... आगे पढ़े

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

Updated on 10 October, 2021, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... आगे पढ़े

जीवन : परमात्मा का अनमोल उपहार

Updated on 9 October, 2021, 6:15
जीवन परमात्मा का अनमोल उपहार है। यह स्वयं ही इतना दिव्य, पवित्र और परिपूर्ण है कि संसार का कोई भी अभाव इसकी पूर्णता को खंडित करने में असमर्थ है। आवश्यकता यह है कि हम अपने मन की गहराई से अध्ययन कर उसे उत्कृष्टता की दिशा में उन्मुख करें।  ईर्ष्या, द्वेष,... आगे पढ़े

क्या है शुद्ध अहिंसा!

Updated on 6 October, 2021, 6:00
गांधी जी ने अपने जीवन में अहिंसा के विविध प्रयोग किए। वे एक वैज्ञानिक थे। उनका जीवन प्रयोगशाला था। उनका प्रारंभिक और अंतिम साहित्य देखने से यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट हो जाता है। बड़े जीव की सुरक्षा के लिए छोटे जीव को मारने में वे पाप बताते थे। खती को... आगे पढ़े

जीवन में विचार की आवश्यकता

Updated on 4 October, 2021, 6:00
कुटिल एवं असत्य विचार से मुक्ति का सरल उपाय सुविचार की भावना दृढ़ करना है। शांतिदायक सुविचार की गंगा प्रवाहित करने पर ही हम मानसिक दुर्बलता से मुक्त हो सकते हैं। प्रत्येक विचार अंत:करण में एक मानसिक मार्ग का निर्माण करता है। हमारी समस्त आदतें ऐसे ही मानसिक मार्ग हैं,... आगे पढ़े

क्षमा भाव आत्मसात करें

Updated on 3 October, 2021, 6:15
बुद्धि का अर्थ है नीर-क्षीर विवेक करने वाली शक्ति और ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा पदार्थ को जान लेना। ज्ञान का अर्थ है आत्मा तथा भौतिक पदार्थ के अन्तर को जानना। आधुनिक शिक्षा में आत्मा के विषय में कोई ज्ञान नहीं दिया जाता, केवल भौतिक तत्वों तथा शारीरिक आवश्यकताओं... आगे पढ़े

कन्या राशि प्रवेश करेगा सूर्य; इस दिन पूजा और स्नान दान की परंपरा,

Updated on 16 September, 2021, 13:57
17 सितंबर, शुक्रवार को सूर्य राशि बदलकर कन्या में आ जाएगा। इसलिए इस दिन कन्या संक्रांति मनाई जाएगी। इस पर्व पर स्नान, दान और पूजा-पाठ करना शुभ माना गया है। कन्या संक्रांति को विश्वकर्मा पूजा दिवस के रूप में भी मनाते हैं। दक्षिण भारत में ये पर्व बहुत ही खास... आगे पढ़े

कैंची काटती है, सुई जोड़ती है 

Updated on 16 September, 2021, 6:15
कैंची काटती (तोड़ती) है और सुई जोड़ती है। यही कारण है कि तोड़ने वाली कैंची पैर के नीचे पड़ी रहती है और जोड़ने वाली सुई सिर पर स्थान पाती है। इसलिए मनुष्य का यही धर्म है कि इनसान को जोड़े न कि तोड़े। उन्होंने सास-बहू में एका होने का आह्वान... आगे पढ़े

सफलता पाने के लिए क्या है जरूरी, जानें यहां!

Updated on 15 September, 2021, 6:45
धर्म के साथ हर किसी के जीवन में सफलता अहम होती है। बल्कि कहा जाता है इसे पाने के लिए ही लोग अपने जीवन में कड़ी मेहनत करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि लोग अपनी तरफ से हर तरह का संभव प्रयास करते हैं जिससे वो अपने जीवन में सफलता... आगे पढ़े

अपने पद का दुरुपयोग करना सही नहीं

Updated on 15 September, 2021, 6:30
धर्म के साथ घटना उस समय की है जब शास्त्री जी गृहमंत्री थे। यह तो सब जानते हैं कि शास्त्री जी बहुत सादगी पसंद और मितव्ययी थे। वह अपने और परिवार के ऊपर एक भी पैसा अनावश्यक नहीं खर्च करते थे। नियमों का कड़ाई से पालन करना उनकी आदत थी। एक... आगे पढ़े

सम्मान देने से सम्मान बढ़ता है

Updated on 15 September, 2021, 6:15
धर्म के साथ सम्राट अशोक एक बार अपने मंत्रियों के साथ कहीं जा रहे थे, तभी रास्ते में उनको एक भिखारी दिखाई दिया। सम्राट अपने रथ से नीचे उतरे और उस भिखारी के पास जाकर अपने सिर को बड़ी ही नम्रता के साथ उसके सामने झुकाया और फिर आगे बढ़... आगे पढ़े

अगर हमारे पास धन नहीं है तो दूसरों को प्रसन्नता तो बांट ही सकते हैं

Updated on 11 September, 2021, 12:25
कहानी - श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का वनवास चल रहा था। वे जंगल-जंगल घूम रहे थे। कई विषयों पर लक्ष्मण और सीता जी के साथ श्रीराम बातें करते थे। वन में जहां कहीं भी ऋषियों के आश्रम दिखते थे, वहां ये तीनों चले जाते थे। एक बार साधु-संतों से बातचीत कर... आगे पढ़े

अधर्म से कमाया गया भोजन

Updated on 9 September, 2021, 14:22
कहानी - महाभारत का युद्ध चल रहा था। 9 दिन बीत चुके थे। दुर्योधन ने भीष्म पितामह से शिकायत करते हुए कहा, 'आप ठीक से युद्ध नहीं कर रहे हैं। हमारे पक्ष के कई राजा मारे गए हैं। मेरे कई भाई मारे जा चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी... आगे पढ़े

सत्ता-संपदा का उन्माद

Updated on 14 August, 2021, 6:00
मनुष्य विचारशील प्राणी है, विवेकशील प्राणी है। उसके पास बुद्धि है, शक्ति है। वह अपनी बुद्धि का उपयोग करता है, चिंतन के हर कोण पर रुकता है, विवेक को जगाता है, शक्ति का नियोजन करता है और संसार के अन्य प्राणियों से बेहतर जीवन जीता है। जीने के लिए वह... आगे पढ़े

जीवन के चार आधार

Updated on 12 August, 2021, 6:00
सुसंस्कारिता के चार आधार हैं- समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी। इन्हें आध्यात्मिक-आंतरिक वरिष्ठता की दृष्टि में उतना ही महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए जितना शरीर के लिए अन्न, जल, वस्त्र और निवास अनिवार्य समझा जाता है। समझदारी का अर्थ है- दूरदर्शी विवेकशीलता अपनाना। आमतौर से लोग तात्कालिक लाभ को सब कुछ... आगे पढ़े

भोलेनाथ को जहरीला धतूरा चढ़ाने का मतलब ये कि अपने मन की कड़वाहट और जहर भी त्याग दें

Updated on 10 August, 2021, 17:03
भगवान शिव का श्रंगार बहुत ही रहस्यमयी और सबसे अलग है। उसमें नाग, भस्म, जहरीले और जंगली फूल और पत्ते शामिल हैं। ऐसा श्रंगार बताता हैं कि भगवान शिव उन सभी को भी अपनाते हैं। जिसे लोगों ने अपने से दूर कर रखा हो। यानी जो चीजें किसी काम की... आगे पढ़े

दरअसल