Monday, 27 May 2019, 6:02 PM

पचमेल

बहुत है तिनके जितना सहारा

Updated on 21 March, 2016, 12:11
इसबार के पचमेल में जिक्र है कि हम किसी के लिए मदद का हाथ बढ़ा दें तो वह छोटी सी मदद उसके लिए डूबते को तिनके का सहारा जितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। हमेशा की तरह आप की प्रतिक्रिया का इंतजार और स्वागत भी। ... आगे पढ़े

कोहरा घना है, चलना कहां मना है

Updated on 21 March, 2016, 12:10
मौसम में ठंडक के दौरान जब उज्जैन, इंदौर सहित कई शहर कोहरे में गुम से थे, इस घने कोहरे ने मुझे श्रीगंगानगर, शिमला आदि की याद दिला दी। इस बार के पचमेल में कोहरा-कथा के साथ वह कविता भी जो श्रीगंगानगर में कोहरे में घिरे होने के दौरान बन पड़ी... आगे पढ़े

अपनों की आखों में आंसू देंगे?

Updated on 21 March, 2016, 12:06
इस बार वाहन दुर्घटनाओं में होने वाली अकाल मौतों पर लिखा है । यदि हम हेलमेट पहनने, कार स्टार्ट करने से पहले सीट बेल्ट लगा लेने, वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात नहीं करने जैसी कुछ छोटी-छोटी बातों का पालन करने लग जाएं तो कम से कम हम अपनी अकाल... आगे पढ़े

जीते जी सहेज लें बुजुर्गों की यादों को

Updated on 21 March, 2016, 12:05
हम तय कर लें तो बुजुर्गों की यादों को सहेजने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। डिजिटल इंडिया वाले इस युग में खूब साधन हैं बुजुर्गों की यादों-किस्सों, कला-समाज-साहित्य-संस्कृति के प्रति उनके समर्पण का रेकार्ड तैयार करने के । उनके ये कार्य, अनंत काल तक हमें प्रेरणा दे सकते... आगे पढ़े

कितना मुश्किल है सच बोलना

Updated on 21 March, 2016, 12:04
बचपन से किशोरावस्था की ओर बढ़ने के दौरान डायरी लिखन्े का शौक लगा था । पता कुछ नहीं था कि कैसे लिखते हैं तो चार-छह पेज रोज भर देते, लिखने के साथ यह चिंता भी रहती कि डायरी किसी के हाथ ना लग जाए......सच लिखना कितना मुश्किल होता है, उसी... आगे पढ़े

दरअसल